नई दिल्ली, जीएसटी काउंसिल ने आखिरकार डिजिटल पेमेंट पर जीएसटी में छूट के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी। ग्राहकों को यह छूट तभी मिलेगी, जब वे खरीदारी करते वक्त “रुपे कार्ड”, “भीम एप” या फिर “यूपीआइ” सिस्टम के जरिये भुगतान करेंगे। हालांकि यह सुविधा किसी एक राज्य में पायलट के तौर पर शुरू की जाएगी और इसका क्रियान्वयन सफल होने पर अन्य राज्यों में इसे लागू किया जाएगा। इस बीच सरकार ने साफ संकेत दिया कि राजस्व संग्रह की चिंता को देखते हुए फिलहाल जीएसटी की दरों में और कटौती के आसार नहीं है। कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की बैठक में डिजिटल भुगतान पर जीएसटी में छूट के प्रस्ताव को हरी झंडी देने के साथ-साथ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की समस्याओं के समाधान और सुझावों पर अमल के लिए एक मंत्रिसमूह गठित करने का भी निर्णय किया गया। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला की अध्यक्षता वाले मंत्रिसमूह में बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी, दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, असम के वित्त मंत्री हेमंत विश्व शर्मा, केरल के वित्त मंत्री थॉमस आइजैक और पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल शामिल हैं। माना जा रहा है कि यह समूह जीएसटी काउंसिल की गोवा में आगामी 28-29 सितंबर को होने वाली बैठक से पहले अपनी रिपोर्ट दे सकता है। गोयल ने काउंसिल के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य स्वैच्छिक आधार पर पायलट स्कीक के रूप में डिजिटल भुगतान पर जीएसटी में छूट की योजना लागू करेंगे। जीएसटीएन और नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया इसके लिए एक सिस्टम विकसित करेंगे, इसके बाद इसे लागू किया जाएगा।

जीएसटी काउंसिल: रुपे कार्ड व भीम ऐप से भुगतान पर मिलेगा 20 फीसद कैशबैक

काउंसिल ने यह निर्णय बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी की अध्यक्षता वाले मंत्रिसमूह की सिफारिशों के आधार पर किया है। मोदी की अध्यक्षता वाले मंत्रिसमूह ने कहा था कि रुपे कार्ड, भीम एप और यूपीए के जरिये डिजिटल भुगतान करने वालों को जीएसटी की राशि में 20 प्रतिशत की छूट दी जाए। हालांकि यह छूट अधिकतम 100 रुपये ही हो। हालांकि काउंसिल की बैठक में दिल्ली, पंजाब, पश्चिम बंगाल और केरल के वित्त मंत्रियों ने इस तरह की छूट देने का सैद्धांतिक रूप से विरोध किया। उनकी दलील थी कि अगर यह निर्णय किया जाता है तो अलग-अलग राज्य फिर ऐसे प्रस्ताव लेकर आ सकते हैं। सूत्रों ने कहा कि बैठक में तमिलनाडु, हरियाणा और असम ने अपने यहां इसके लिए पायलट स्कीम शुरू करने की पेशकश की। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि जीएसटी की दरों में अब और कटौती नहीं की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक जीएसटी काउंसिल की बैठक में वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में अब तक राजस्व संग्रह के आंकड़ों को लेकर सरकार चिंतित है, इसलिए फिलहाल दरों में और कटौती नहीं की जाएगी। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सरकार की उम्मीद से लगभग 43,000 करोड़ रुपये कम जीएसटी राजस्व मिला है। केंद्र को उम्मीद थी कि जीएसटी से हर माह एक लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि केंद्र और राज्यों को प्राप्त होगी लेकिन अप्रैल को छोड़ दें तो अब तक ऐसा देखने को नहीं मिला है। यही वजह है कि पहली तिमाही में राजस्व संग्रह लगभग 43,000 करोड़ रुपये कम रहा। जीएसटी लागू होने के बाद से सरकार एक तिहाई वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी की दरें घटा चुकी है। इससे खजाने पर पिछले साल जुलाई से इस साल मार्च के दौरान लगभग 70 हजार करोड़ रुपये का बोझ पड़ने का अनुमान है। 21 जुलाई की जीएसटी काउंसिल की बैठक में 88 वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी की दर घटायी गयी थी। इससे सरकार पर सालाना 8-10 हजार करोड़ रुपये का बोझ पड़ने का अनुमान है।